उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने राज्यों से कहा कि वे पुराने कानूनों की समीक्षा करें और उन्हें निरस्त करें। उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद के लिए हर मामले में एकरूपता की आवश्यकता नहीं है।
BulletsIn
- उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 22 अक्टूबर, 2026 को “सहकारी संघवाद और कानून सुधार: राष्ट्रीय और राज्य परिप्रेक्ष्य” विषय पर भारतीय विधि आयोग के सम्मेलन का उद्घाटन किया।
- यह सम्मेलन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।
- उन्होंने राज्यों से शासन और जीवन की सुगमता में सुधार के लिए पुराने कानूनों की समीक्षा करने और उन्हें निरस्त करने का आग्रह किया।
- उन्होंने राज्य विधि आयोगों से उन कानूनों की पहचान करने को कहा, जिन्हें संशोधन या निरस्त करने की आवश्यकता है।
- उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद का अर्थ हर मामले में एकरूपता नहीं है।
- उन्होंने कहा कि राज्यों को संघ के साथ काम करते हुए अपनी विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए लचीलापन बनाए रखना चाहिए।
- उन्होंने औपनिवेशिक युग के तीन आपराधिक कानूनों की जगह और पिछले 12 वर्षों में 1,700 से अधिक पुराने कानूनों को निरस्त करने का हवाला दिया।
- इस अवसर पर विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल और विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) दिनेश माहेश्वरी भी उपस्थित थे।
टैगः सहकारी संघवाद, भारत का विधि आयोग, विधि सुधार





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.