भारत के उपराष्ट्रपति देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी होते हैं। संविधान के अनुच्छेद 63-73 में उनके कार्य, शक्तियाँ और चुनाव प्रक्रिया वर्णित हैं। उनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। वे राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कार्य करते हैं।
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- उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के बाद दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद
- कार्यकाल 5 वर्ष, पर उत्तराधिकारी के आने तक पद पर रह सकते हैं
- राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं
- राष्ट्रपति की अनुपस्थिति या रिक्ति में कार्यकारी राष्ट्रपति बनते हैं
- लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों द्वारा चुने जाते हैं
- भारत का नागरिक होना, 35+ उम्र, राज्यसभा सदस्य हेतु योग्य होना आवश्यक
- कार्यकाल में कोई अन्य लाभ का पद नहीं रख सकते
- राष्ट्रपति को लिखित रूप से त्यागपत्र देकर इस्तीफा दे सकते हैं
- राज्यसभा के प्रस्ताव और लोकसभा की सहमति से हटाए जा सकते हैं
- हटाने के लिए राज्यसभा में प्रभावी बहुमत, लोकसभा में साधारण बहुमत जरूरी
- उपराष्ट्रपति को अलग वेतन नहीं, ₹1.25 लाख राज्यसभा सभापति के रूप में मिलता है
- कार्यकारी राष्ट्रपति बनने पर ₹1.5 लाख मिलता है, सभापति का वेतन नहीं मिलता
- उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर संविधान मौन है
- इस स्थिति में राज्यसभा के उपसभापति या राष्ट्रपति द्वारा अधिकृत सदस्य कार्य संभालते हैं





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