भारतीय संविधान में बहुमतों का सीधा वर्गीकरण नहीं है, लेकिन विभिन्न अनुच्छेदों से चार प्रमुख प्रकार सामने आते हैं — पूर्ण (Absolute), प्रभावी (Effective), साधारण (Simple), और विशेष (Special) बहुमत।
- पूर्ण बहुमत (Absolute Majority)
- सदन की कुल सदस्य संख्या का 50% से अधिक।
- उदाहरण: लोकसभा (545 सदस्य) → 273 आवश्यक।
- सरकार गठन के लिए उपयोग किया जाता है।
- प्रभावी बहुमत (Effective Majority)
- रिक्त सीटों को छोड़कर 50% से अधिक।
- उदाहरण: राज्यसभा में 200 प्रभावी सदस्य → 101 आवश्यक।
- उपराष्ट्रपति, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर को हटाने में प्रयोग।
- साधारण बहुमत (Simple Majority)
- उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 50% से अधिक।
- सबसे सामान्य रूप से प्रयोग में आने वाला बहुमत।
- साधारण, वित्तीय, मनी बिल, अविश्वास प्रस्ताव, आपातकाल की घोषणा, आदि में आवश्यक।
- विशेष बहुमत (Special Majority)
- अन्य सभी प्रकारों से अलग।
- इसके चार उप-प्रकार हैं:
- अनुच्छेद 249 के अनुसार – उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से।
- संसद को राज्य सूची में कानून बनाने की शक्ति देने हेतु।
- अनुच्छेद 368 के अनुसार – उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत + कुल संख्या के 50% से अधिक।
- संविधान संशोधन विधेयक, न्यायाधीशों/CEC/CAG को हटाने, राष्ट्रीय आपातकाल की स्वीकृति हेतु।
- अनुच्छेद 368 + राज्य अनुमोदन – 2/3 बहुमत + 50% राज्यों की स्वीकृति (साधारण बहुमत से)।
- संघीय ढांचे में परिवर्तन जैसे मामलों में, जैसे NJAC बिल।
- अनुच्छेद 61 के अनुसार – सदन की कुल सदस्य संख्या के 2/3 से।
- राष्ट्रपति के महाभियोग के लिए आवश्यक।





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