इस सप्ताह वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिले, जिनमें ईरान पर अमेरिकी दबाव, यूक्रेन गतिरोध, भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग और नई दिल्ली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन शामिल रहे।
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- संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु संवर्धन समझौते पर शीघ्र निर्णय लेने की नई समयसीमा दी और असफलता की स्थिति में गंभीर परिणामों की चेतावनी दी।
- नवगठित शांति बोर्ड की पहली बैठक वाशिंगटन में आयोजित हुई, जिसमें गाजा पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर की प्रतिबद्धता जताई गई, हालांकि युद्धविराम अभी भी नाजुक बना हुआ है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई, जिसमें उन्नत विमानवाहक पोत समूह और लड़ाकू विमान शामिल हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव की आशंका बढ़ गई है।
- संयुक्त राज्य, यूक्रेन और रूस के बीच त्रिपक्षीय वार्ता डोनबास क्षेत्र को लेकर जारी मतभेदों को सुलझाने में विफल रही, जहां रूस का व्यापक नियंत्रण बना हुआ है।
- विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में यूरोपीय सहयोगियों को आश्वस्त किया, साथ ही कुछ घरेलू नीतियों पर अपनी असहमति भी व्यक्त की।
- भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने सुरक्षित अर्धचालक आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने और चीन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
- दुर्लभ खनिजों पर चीन के निर्यात प्रतिबंधों के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे सामरिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
- नई दिल्ली में आयोजित पहले कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाव शिखर सम्मेलन में अनेक देशों के नेता, मंत्री और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए।





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