भारत में एंट्री-लेवल आईटी नौकरियाँ एआई और ऑटोमेशन की वजह से तेजी से खत्म हो रही हैं।
नए इंजीनियरों को नौकरियाँ नहीं मिल रहीं, कॉलेज की पढ़ाई अब बाज़ार से मेल नहीं खा रही है।
BulletsIn
- ChatGPT और Copilot जैसे टूल्स अब बेसिक कोडिंग कार्य कर रहे हैं
- विप्रो ने फ्रेशर भर्ती 38,000 (FY23) से घटाकर 10,000 (FY25) की
- इंफोसिस ने कई फ्रेशरों की जॉइनिंग एक साल से अधिक टाल रखी है
- FY25 में केवल 1.6 लाख फ्रेशर हायर होंगे, FY23 में 2.3 लाख थे
- केवल 47% इंजीनियरिंग ग्रैजुएट्स को टेक सेक्टर के लायक माना गया
- भारत के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई पर कोर्स और प्रशिक्षित स्टाफ बहुत कम
- GCC कंपनियाँ (जैसे Walmart, Siemens) सिर्फ टियर-1 कॉलेजों से चुनिंदा हायरिंग कर रही हैं
- अमेरिका में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को छंटनी और वीज़ा संकट झेलना पड़ रहा है
- दुनियाभर में एंट्री-लेवल सीएस ग्रैजुएट्स को नौकरियाँ मिलना मुश्किल
- समाधान: कोर्स अपडेट हों, AI और रियल वर्ल्ड स्किल्स पढ़ाई जाएँ, इंटर्नशिप बढ़ाई जाए





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