1 फरवरी, 2025 को प्रस्तुत हुए केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत के टैक्स बकायों का आंकड़ा चिंताजनक रूप से बढ़ा हुआ दिख रहा है। सरकार के खर्च में वृद्धि के बावजूद, टैक्स बकाया भारत की आर्थिक सेहत के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। यह बकाया, जिसमें विवादित और अविवादित दोनों प्रकार के टैक्स शामिल हैं, देश की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल रहा है।
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- कुल टैक्स बकाया ₹31 लाख करोड़ है, जबकि गैर-कर बकाया ₹3.65 लाख करोड़ है, जिससे कुल बकाया ₹34 लाख करोड़ हो गया है।
- विवादित टैक्स ₹13.36 लाख करोड़ हैं, जिसमें से ₹2.50 लाख करोड़ 5 साल से अधिक समय से लंबित हैं।
- ₹15.22 लाख करोड़ टैक्स बकाया है, जिसमें से ₹5 लाख करोड़ 5 साल से अधिक समय से लंबित हैं।
- बकायों का मुख्य स्रोत कॉरपोरेशन टैक्स और आयकर है, जिनका कुल बकाया ₹13.29 लाख करोड़ है।
- गैर-कर राजस्व बकाया, जैसे पेट्रोलियम सेस और रॉयल्टी, ₹3.65 लाख करोड़ है।
- 2024 से 2025 तक टैक्स बकायों में ₹10 लाख करोड़ की वृद्धि हुई है, जो वित्तीय संकट को बढ़ावा दे रहा है।
- सरकार ने इन बकायों की वसूली के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं, जो इस बढ़ती समस्या को और गंभीर बना रहा है।
- अनुशंसाएं शामिल हैं कि तकनीक और डाटाबेस का उपयोग कर डिफॉल्टरों का पता लगाया जाए और विशेष टीमों का गठन किया जाए।
- अगर जल्दी कार्रवाई नहीं की गई, तो ये बकायें सरकार की वित्तीय स्थिति को और कमजोर करेंगे।





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