भारत में चुनावों से पहले भाषा पर विवाद तेज हो रहे हैं। नेता हिंदी या स्थानीय भाषाओं के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। लेकिन आम जनता, खासकर युवा, भाषा नहीं बल्कि नौकरी को प्राथमिकता दे रहे हैं। विडंबना यह है कि जो नेता अंग्रेजी या हिंदी का विरोध करते हैं, वे खुद अपने बच्चों




