2 फरवरी 1835 को ब्रिटिश राजनेता थॉमस बैबिंगटन मैकॉले ने भारत में “भारतीय शिक्षा पर मिनट” प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव ने औपनिवेशिक शिक्षा नीति की दिशा बदल दी, जिससे परंपरागत भारतीय शिक्षा के बजाय अंग्रेज़ी आधारित पश्चिमी शिक्षा को बढ़ावा मिला। मैकॉले ने यूरोपीय साहित्य और विज्ञान को श्रेष्ठ बताया और सरकार से केवल अंग्रेज़ी




