19वीं–20वीं सदी में भारत में सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन ब्रिटिश शासन, सामाजिक पतन और आधुनिकता के जवाब में उभरे। हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदायों के सुधारकों ने रूढ़ियों को चुनौती दी और धर्मों को आधुनिक मूल्यों के अनुरूप ढाला। BulletsIn आंदोलनों ने जातिवाद, सती, बाल विवाह, छुआछूत, महिलाओं के दमन का विरोध किया। राजा राममोहन राय,




