चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी जैसे एआई मॉडल अक्सर ऐसा प्रतीत कराते हैं मानो वे “सोच” रहे हों। वे जवाब सुधारते हैं, माफी मांगते हैं और मानवीय संवाद की नकल करते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किसी मशीन दिमाग का प्रमाण नहीं, बल्कि भौतिक प्रक्रियाओं का परिणाम है—जैसे पानी का भाप में बदलना।




