अर्थ डे के अवसर पर, फ्रेंड्स ऑफ द अर्थ इंटरनेशनल की रिपोर्ट ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संकट आपस में जुड़े हुए हैं और तेज़ी से बिगड़ रहे हैं। रिपोर्ट COP30 सम्मेलन से पहले मौजूदा आर्थिक-राजनीतिक ढांचे में गहरे बदलाव की मांग करती है।
BulletsIn
- जलवायु और जैव विविधता संकट का स्रोत एक ही व्यवस्था
- 1 करोड़ प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में, कारण चरम मौसम व आवास विनाश
- पारिस्थितिकी तंत्र की क्षति से जलवायु अस्थिरता बढ़ रही
- औद्योगिक कृषि और जंगलों की कटाई से बायोमास घटा
- कार्बन व जैव विविधता ऑफसेट हैं भ्रामक समाधान, असली नहीं
- बायोफ्यूल उत्पादन से भूमि विवाद, खाद्य संकट, आदिवासी समुदाय प्रभावित
- “हरित आवरण” के नाम पर एक ही प्रजाति के वृक्षारोपण की आलोचना
- वैश्विक दक्षिण और आदिवासी समुदायों पर सबसे ज्यादा प्रभाव
- महिलाओं और स्थानीय समुदायों की भूमिका अहम, पर अनदेखी
- रिपोर्ट में शोषणकारी व्यवस्था को जड़ से खत्म करने की मांग





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