स्वराज पार्टी की स्थापना 1923 में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुई।
यह कांग्रेस के भीतर औपनिवेशिक विधानसभाओं में भागीदारी को लेकर मतभेदों के बाद बनी।
पार्टी का उद्देश्य व्यवस्था के भीतर रहकर ब्रिटिश शासन का विरोध करना था।
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असहयोग आंदोलन की धीमी गति के बाद 1923 में गठन
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संस्थापक: चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू
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कांग्रेस–खिलाफत स्वराज पार्टी के नाम से भी प्रसिद्ध
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कांग्रेस के भीतर परिषद् प्रवेश बहिष्कार का विरोध
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विधानसभाओं के माध्यम से स्वशासन का लक्ष्य
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प्रांतीय और केंद्रीय विधान परिषदों में प्रवेश
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औपनिवेशिक बजट और कानूनों को रोकने का प्रयास
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जनता में राजनीतिक चेतना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका
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बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय
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संवैधानिक राजनीति के विकास में योगदान





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