सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि राजस्व विभाग के कब्जे में दर्ज सभी ‘वन भूमि’ तीन महीने के भीतर संबंधित वन विभाग को वापस सौंपी जाए। यह आदेश वन भूमि के दुरुपयोग और निजी उपयोग के आरोपों के बाद आया है।
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- सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वन भूमि वन विभाग को लौटाने का आदेश
- तीन महीने में भूमि का हस्तांतरण अनिवार्य
- मुख्य सचिवों और प्रशासकों को एसआईटी गठित करने का निर्देश
- जांच में निजी व्यक्तियों/संस्थानों को दी गई भूमि पर फोकस
- अगर भूमि वापसी संभव नहीं, तो लागत वसूल कर हरित कार्यों में लगाई जाए
- वसूली गई राशि से वनीकरण और संरक्षण कार्य होंगे
- एक साल के भीतर सभी भूमि हस्तांतरण की निगरानी के लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी
- भूमि का उपयोग केवल वनीकरण के लिए किया जा सकेगा
- फैसला CJI बीआर गवई, जस्टिस मसीह और जस्टिस चंद्रन की पीठ ने सुनाया
- याचिका में बिल्डरों, नौकरशाहों और नेताओं की मिलीभगत से भूमि हड़पने के आरोप लगाए गए थे





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