वैश्विक व्यापार को बढ़ाने के लिए बनाए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) अब उलझनों का कारण बन रहे हैं। 1995 में अर्थशास्त्री जगदीश भगवती द्वारा प्रस्तुत “स्पैगेटी बाउल परिघटना” व्यापार नियमों के इस जटिल जाल को दर्शाती है। एशिया और लैटिन अमेरिका में कई FTA एक-दूसरे से टकराते हैं, जिससे व्यापार करना मुश्किल होता जा रहा है।
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- स्पैगेटी बाउल = ओवरलैपिंग एफटीए का उलझा जाल
- 1995 में जगदीश भगवती ने दिया यह शब्द
- व्यापार को सरल बनाने वाले एफटीए अब बन रहे बोझ
- हर एफटीए के अलग होते हैं रूल्स ऑफ ओरिजिन (ROO)
- अलग-अलग ROO से लागत बढ़ती, लाभ घटते
- छोटे व्यवसाय (SMEs) एफटीए का कम उपयोग करते हैं
- दक्षिण और पूर्वी एशिया में व्यापार स्थिर पड़ा है
- एशिया, लैटिन अमेरिका सबसे अधिक प्रभावित
- व्यापार का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है
- समाधान: ROO का एकीकरण, मेगा क्षेत्रीय समझौते, WTO सुधार





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