गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) और डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट (DPM) की सराहना की, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस से अपना संबंध तोड़कर भारतीय संविधान के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। शाह ने इस बदलाव को मोदी सरकार की एकता की दिशा में एक बड़ी जीत बताया।
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- अमित शाह ने JKPM और DPM की भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की सराहना की।
- JKPM और DPM पहले हुर्रियत कांफ्रेंस से जुड़े थे।
- दोनों संगठनों ने अलगाववाद का विरोध करते हुए हुर्रियत के एजेंडे से अपने संबंध समाप्त किए।
- शाह ने कश्मीर में अलगाववाद को अतीत की बात बताया।
- शाह ने इस कदम का स्वागत किया, इसे भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम बताया।
- शाह ने सभी अलगाववादी समूहों से यह मार्ग अपनाने और अलगाववाद को छोड़ने की अपील की।
- JKPM की स्थापना आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने की थी, जो बाद में सरकारी सेवा में वापस लौटे।
- DPM के नेता मोहम्मद शफी रशी, जो पहले सैयद अली गीलानी के करीबी थे, ने भी हुर्रियत से अपना संबंध तोड़ लिया।
- हुर्रियत के अंतर्गत आने वाले अलगाववादी समूहों को मोदी सरकार ने UAPA के तहत “अवैध” घोषित किया।
- शाह ने हुर्रियत के प्रभाव का अंत और पहले पाकिस्तान और आतंकवादी समूहों के साथ हुई वार्ताओं का उल्लेख किया।





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