भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत स्टार्टअप संस्थापक अपनी कंपनी के सार्वजनिक होने के बाद भी Employee Stock Option Plans (ESOPs) बनाए रख सकेंगे। यह कदम उन संस्थापकों का समर्थन करने के लिए है, जो अक्सर अपनी कंपनी के शुरुआती वर्षों में नकद वेतन के बदले ESOPs प्राप्त करते हैं।
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- SEBI का नया प्रस्ताव स्टार्टअप संस्थापकों को IPO के बाद भी ESOPs बनाए रखने की अनुमति देगा।
- संस्थापक अक्सर ESOPs प्राप्त करते हैं, जो उनके और शेयरधारकों के हितों को संरेखित करता है।
- जैसे-जैसे स्टार्टअप धन जुटाते हैं, संस्थापकों की स्वामित्व हिस्सेदारी कम हो जाती है और वर्तमान नियमों के तहत उन्हें प्रमोटर के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
- SEBI के मौजूदा नियमों के तहत प्रमोटरों को नए ESOPs जारी करने पर प्रतिबंध है, जिससे संस्थापकों के लिए पहले से प्राप्त ESOPs का लाभ खोने का संकट पैदा होता है।
- प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया है कि संस्थापकों को जो ESOPs दिए गए थे, वे प्रमोटर के रूप में वर्गीकृत होने पर भी लागू रहेंगे।
- हालांकि, प्रमोटरों को नए ESOPs जारी करने का नियम लागू रहेगा।
- यह बदलाव सुनिश्चित करेगा कि संस्थापक अपनी कंपनी के सार्वजनिक होने के बाद भी ESOP लाभ खोने से बचें।
- यह कदम संस्थापकों के लिए उनके इक्विटी-आधारित मुआवजे को और अधिक उचित बनाने में मदद करेगा।
- SEBI ने हाल ही में DigiLocker के साथ साझेदारी की है ताकि निवेशक अपनी प्रतिभूति होल्डिंग्स को सुरक्षित तरीके से ट्रैक कर सकें।
- DigiLocker के साथ एकीकरण से निवेशक अपने डिमैट खातों, म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स और अन्य जानकारी को स्टोर और पुनः प्राप्त कर सकेंगे।





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