सैय्यद वंश ने 1414 से 1451 तक दिल्ली पर शासन किया, तुगलक वंश के बाद और लोदी वंश के पहले। मुल्तान के सूबेदार और तैमूर के प्रतिनिधि खिज्र खान ने इस वंश की स्थापना की थी। आंतरिक विद्रोह, आर्थिक संकट और कमजोर नेतृत्व के कारण यह वंश अंततः समाप्त हो गया।
BulletsIn
- सैय्यद वंश ने 37 वर्षों (1414–1451) तक दिल्ली सल्तनत पर राज किया
- स्थापना खिज्र खान ने की, जो तैमूर का भारतीय प्रतिनिधि था
- तुगलक के पतन के बाद दिल्ली में अराजकता; खिज्र ने कानून-व्यवस्था बहाल की
- मुबारक शाह ने विद्रोह दबाए, मुबारकाबाद शहर बसाया
- मुबारक की हत्या के बाद मुहम्मद शाह शासक बने; दरबारी साजिशों से जूझे
- अंतिम शासक आलम शाह कमजोर; बदायूं में रहने लगे, दिल्ली छोड़ दी
- व्यापार कमजोर, कर बोझ भारी; समुद्री व्यापार मार्ग टूटे
- सत्ता विकेन्द्रित; गवर्नर शक्तिशाली; जौनपुर, ग्वालियर, दोआब में विद्रोह
- शासन शरीयत पर आधारित; सुल्तान व वज़ीर के पास प्रमुख अधिकार
- 1451 में सैय्यद वंश खत्म; हमीद ख़ान की मदद से बहलूल लोदी ने दिल्ली छीनी





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.