सबरीमला विवाद 2018 के सुप्रीम कोर्ट निर्णय के बाद फिर उभर आया, जब अदालत ने 10–50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी परंपरागत रोक को असंवैधानिक बताया। फैसले के बाद केरल में भारी विरोध हुआ, जिससे परंपरा और संवैधानिक अधिकारों के बीच टकराव गहरा गया।
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• SC ने 2018 में सभी आयु की महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दी
• पहले 10–50 वर्ष की महिलाओं पर प्रवेश प्रतिबंधित परंपरा थी
• कोर्ट ने प्रतिबंध को अनुच्छेद 14, 15, 25 का उल्लंघन माना
• 4:1 निर्णय; जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने धार्मिक स्वायत्तता का पक्ष लिया
• फैसले के बाद राज्यभर में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए
• समर्थन पक्ष: लैंगिक समानता, पूजा का अधिकार, पितृसत्ता पर रोक
• विरोध पक्ष: परंपरा, शुद्धता का सिद्धांत, अयप्पा की ब्रह्मचर्य प्रतिज्ञा
• ‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’ परीक्षण की वैधता पर सवाल उठे
• 2 जनवरी 2019 को दो महिलाएं पुलिस सुरक्षा में मंदिर पहुँचीं
• विवाद दिखाता है कि आस्था और संवैधानिक अधिकार कैसे भिड़ते हैं





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