1930 से 1932 के बीच लंदन में तीन गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए गए ताकि भारत के संवैधानिक सुधारों पर चर्चा हो सके। इन सम्मेलनों का उद्देश्य डोमिनियन स्टेटस और संघीय ढाँचे पर सहमति बनाना था, लेकिन कांग्रेस की अनुपस्थिति/असहमति और गहरे राजनीतिक मतभेदों के कारण ये largely असफल रहे। अंततः इनसे भारत सरकार अधिनियम 1935 बना।
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* पृष्ठभूमि: सविनय अवज्ञा आंदोलन, साइमन रिपोर्ट विरोध, इर्विन की वार्ता प्रस्ताव
* उद्देश्य: भारत के लिए नया संवैधानिक ढाँचा; डोमिनियन स्टेटस पर विचार
* कांग्रेस 1st RTC में अनुपस्थित; 2nd RTC में केवल गांधी प्रतिनिधि
* पहला सम्मेलन (Nov 1930–Jan 1931): 74 भारतीय; रियासतें, मुस्लिम लीग, जस्टिस पार्टी शामिल; कांग्रेस नहीं → प्रगति सीमित
* प्रमुख मुद्दे: संघीय ढाँचा, अल्पसंख्यक संरक्षण, अलग निर्वाचन; आंबेडकर ने दलितों के लिए अलग निर्वाचन मांगा
* बाद में गांधी–इर्विन समझौता → कांग्रेस 2nd RTC में शामिल
* दूसरा सम्मेलन (Sep–Dec 1931): गांधी उपस्थित; अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व पर तीखी बहस; गांधी vs आंबेडकर (कम्युनल अवॉर्ड → बाद में पूना समझौता)
* गंभीर मतभेदों के कारण सम्मेलन निष्फल
* तीसरा सम्मेलन (Nov–Dec 1932): केवल 46 प्रतिभागी; कांग्रेस व लेबर पार्टी अनुपस्थित → सम्मेलन बेअसर
* सुझावों को 1933 White Paper में संकलित किया गया → 1935 अधिनियम का आधार
* समग्र प्रभाव: ब्रिटिशों को कांग्रेस की केंद्रीय भूमिका का अहसास; पूर्ण स्वतंत्रता की मांग तेज हुई





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