भारत का रक्षा निर्यात FY 2025–26 में ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो तेजी से विकास और वैश्विक मांग को दर्शाता है।
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- रक्षा निर्यात 62.66% बढ़कर ₹23,622 करोड़ से ₹38,424 करोड़ हो गया।
- पिछले पांच वर्षों में रक्षा निर्यात लगभग तीन गुना बढ़ा है।
- DPSUs का योगदान ₹21,071 करोड़ रहा, जिसमें 151% की वृद्धि हुई।
- निजी क्षेत्र का योगदान ₹17,353 करोड़ रहा, जो बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
- भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है।
- म्यांमार, फिलीपींस और आर्मेनिया प्रमुख निर्यात गंतव्य हैं।
- 2016–2025 के बीच नौसेना से जुड़े निर्यात का हिस्सा लगभग 55% रहा।
- निर्यातकों की संख्या 128 से बढ़कर 145 हो गई है।
- iDEX (Innovations for Defence Excellence) स्टार्टअप और MSMEs को बढ़ावा देता है।
- Defence Industrial Corridors उत्पादन और निर्यात को मजबूत करते हैं।
- इंडिजिनाइजेशन लिस्ट आयात को सीमित कर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देती है।
- सरल निर्यात प्रक्रियाएं और ease of doing business से निर्यात बढ़ रहा है।
- रक्षा निर्यात से रोजगार, आर्थिक विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी बढ़ती है।
- यह Aatmanirbhar Bharat को मजबूत करता है।
- 2029 तक ₹50,000 करोड़ रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।





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