वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना कम मानी जा रही है।
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- विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक निकट भविष्य में नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि नहीं करेगा।
- नैटिक्सिस के अर्थशास्त्री त्रिन्ह गुयेन के अनुसार वर्तमान महंगाई मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष की बाधाओं के कारण उत्पन्न हुई है, न कि उपभोक्ता मांग में तेज वृद्धि के कारण।
- आपूर्ति आधारित महंगाई तब उत्पन्न होती है जब ऊर्जा कीमतों में वृद्धि, परिवहन व्यवधान या कच्चे माल की कमी के कारण उत्पादन लागत बढ़ जाती है।
- ब्याज दरों में वृद्धि आमतौर पर मांग आधारित महंगाई को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी होती है, जबकि आपूर्ति आधारित झटकों पर इसका प्रभाव सीमित रहता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार देश की खुदरा महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य दायरे के भीतर बनी हुई है।
- तेल विपणन कंपनियों के अपेक्षाकृत बेहतर लाभ मार्जिन के कारण घरेलू ईंधन कीमतों में तुरंत बड़ी वृद्धि की संभावना कम मानी जा रही है।
- हालांकि यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भविष्य में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
- भारतीय रिजर्व बैंक वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति और आर्थिक परिस्थितियों पर नजर रखते हुए आगे की मौद्रिक नीति से जुड़े निर्णय ले सकता है।





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