Rani Gaidinliu ने हेराका आंदोलन के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया और आदिवासी समाज को संगठित किया।
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- 1915 में मणिपुर में जन्म, 13 वर्ष की आयु में हेराका आंदोलन से जुड़ीं और हैपौ जादोनांग के नेतृत्व में ब्रिटिश नीतियों का विरोध शुरू किया
- 1931 में जादोनांग के निधन के बाद नेतृत्व संभाला और आंदोलन को सांस्कृतिक से राजनीतिक संघर्ष में परिवर्तित किया
- आंदोलन का उद्देश्य पारंपरिक धर्म और संस्कृति का संरक्षण तथा जबरन श्रम और करों का विरोध करना था
- आदिवासी समुदायों को कर न देने और ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के लिए प्रेरित किया
- 1932 में गिरफ्तारी के बाद आजीवन कारावास, लगभग 14 वर्ष जेल में बिताए और 1947 में रिहाई हुई
- Jawaharlal Nehru ने उन्हें “पहाड़ियों की बेटी” कहकर सम्मानित किया और “रानी” की उपाधि दी
- पद्म भूषण सहित कई सम्मान प्राप्त, आदिवासी अधिकार, संस्कृति और महिला नेतृत्व की प्रतीक के रूप में याद की जाती हैं





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