पोलिगार विद्रोह 1799 से 1805 के बीच दक्षिण भारत में हुआ एक महत्वपूर्ण आंदोलन था, जिसमें स्थानीय शासकों ने ब्रिटिश कर नीति और अधिकारों में हस्तक्षेप के खिलाफ विद्रोह किया। यह भारत में स्वतंत्रता के प्रारंभिक संघर्षों में से एक माना जाता है।
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- पोलिगार विद्रोह 1799 से 1805 के बीच दक्षिण भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ हुआ।
- पोलिगार स्थानीय सामंती शासक थे, जिन्हें नायक शासकों द्वारा भूमि दी गई थी।
- विद्रोह का मुख्य कारण भारी कर और ब्रिटिश द्वारा अधिकारों में हस्तक्षेप था।
- प्रथम पोलिगार युद्ध 1799 में वीरपांड्या कट्टबोम्मन के नेतृत्व में हुआ।
- कट्टबोम्मन ने कर देने से इनकार किया, जो प्रतिरोध का प्रतीक बना।
- द्वितीय पोलिगार युद्ध में मरुडु भाइयों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- विद्रोहियों ने तूतुकुड़ी सहित कई किलों पर कब्जा किया।
- इस आंदोलन को किसानों और स्थानीय लोगों का समर्थन मिला।
- अंत में मरुडु भाइयों को पकड़कर 1801 में दंडित किया गया।
- यह विद्रोह आगे के स्वतंत्रता आंदोलनों के लिए प्रेरणा बना।





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