प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के लेख को साझा करते हुए कहा कि वैश्विक जलवायु वित्त को पारदर्शिता और साझा मानकों के साथ पुनर्गठित करने का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत का ड्राफ्ट क्लाइमेट फाइनेंस टैक्सोनॉमी और घरेलू हरित वित्त का तेज़ विकास एक व्यवहारिक नेतृत्व मॉडल प्रस्तुत करता है।
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* PM ने यादव का लेख साझा किया: वैश्विक जलवायु वित्त को तुरंत सुधारने की ज़रूरत
* मुख्य फोकस: पारदर्शिता, कॉमन स्टैंडर्ड, भरोसा बहाली
* यादव: जलवायु वित्त अस्पष्ट—अनुदान, रियायती ऋण या बदला हुआ विकास फंड?
* मौजूदा ढांचा (MDBs, GCF, GEF) अपर्याप्त और संरचनात्मक रूप से कमजोर
* समस्याएँ: जवाबदेही की कमी, अपारदर्शी रिपोर्टिंग, अमीर देशों का प्रभुत्व
* विकासशील देशों के लिए कठिन पहुँच—जटिल आवेदन, महँगे ऋण, बढ़ता ऋण बोझ
* COP सम्मेलनों में भारत की पुनरावृत्ति: $1 ट्रिलियन सालाना जलवायु वित्त
* G20 अध्यक्षता के दौरान भारत ने MDB सुधारों को आगे बढ़ाया
* घरेलू स्तर पर: क्लाइमेट फाइनेंस टैक्सोनॉमी, मजबूत ग्रीन फाइनेंस ढाँचा
* सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड को वैश्विक मांग; FY 2025–26 में ₹10,000 करोड़ और जुटाए जाएंगे
* RBI और SEBI ग्रीन फाइनेंस के लिए सख़्त पारदर्शिता मानक बना रहे
* भारत को नेट-ज़ीरो 2070 लक्ष्य के लिए $10 ट्रिलियन निवेश की आवश्यकता
* यादव: भविष्य की वैश्विक संरचना तीन स्तंभों पर आधारित—पारदर्शी मानक, MDBs का लोकतांत्रिक शासन, नवाचारी ऋण/लचीलापन तंत्र





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