संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका (Executive) विधायिका (Legislature) से शक्ति प्राप्त करती है और उसी के प्रति उत्तरदायी रहती है। भारत ने ब्रिटिश मॉडल अपनाया है, जिसमें सामूहिक उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक नियंत्रण की विशेषता है।
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- कार्यपालिका विधायिका के बहुमत पर निर्भर; विश्वास बनाए रखने पर ही सत्ता में रहती है।
- ब्रिटिश वेस्टमिंस्टर मॉडल पर आधारित; अनुच्छेद 74–75 (केंद्र) और 163–164 (राज्य) में व्यवस्था।
- द्वैत कार्यपालिका — नाममात्र (राष्ट्रपति/राजा) और वास्तविक (प्रधानमंत्री)।
- प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख; मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी।
- विधायिका और कार्यपालिका में तालमेल, अधिनायकवाद से सुरक्षा।
- उत्तरदायी, सहभागी और लचीली शासन प्रणाली।
- दोष: प्रधानमंत्री की प्रधानता, अस्थिर सरकारें, नीतिगत निरंतरता की कमी।
- नौकरशाही का प्रभाव अधिक, मंत्री विषय विशेषज्ञ नहीं होते।
- दलबदल विरोधी कानून से सांसदों की स्वतंत्र राय सीमित।
- ब्रिटेन में राजा, सर्वोच्च संसद और ‘शैडो कैबिनेट’; भारत में निर्वाचित राष्ट्रपति, सीमित संसद शक्तियाँ, कानूनी जवाबदेही नहीं।
- भारत ने इसे अपनाया क्योंकि यह उपनिवेशकालीन अनुभव, जवाबदेही और शक्तियों के केंद्रीकरण से बचाव पर आधारित था।





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