संसदीय फोरम सांसदों को राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर अनौपचारिक और संरचित मंच प्रदान करते हैं, जिससे संसद और समितियों में सार्थक भागीदारी सुनिश्चित होती है।
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संसदीय फोरम अनौपचारिक मंच हैं, जहाँ सांसद उभरते नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करते हैं, बिना रिपोर्ट प्रस्तुत किए या संसदीय समितियों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किए।
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अगस्त 2005 में जल संरक्षण फोरम की स्थापना से शुरुआत हुई, जिसके बाद राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अन्य फोरम गठित किए गए।
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वर्तमान में आठ संसदीय फोरम कार्यरत हैं, जो जल प्रबंधन, बच्चे, युवा, जनसंख्या, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और विकास से जुड़े विषयों को कवर करते हैं।
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अधिकांश फोरम के अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष होते हैं, जिससे दोनों सदनों के बीच संतुलन और संस्थागत मार्गदर्शन सुनिश्चित होता है।
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प्रत्येक फोरम में सीमित संख्या में सांसद होते हैं तथा विशेषज्ञों को आमंत्रित कर शोध, अनुभव और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा की जाती है।
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इन फोरम का उद्देश्य सांसदों को संवेदनशील बनाना, विशेषज्ञों से संवाद बढ़ाना और संसद में तथ्यपरक तथा प्रभावी नीतिगत विमर्श को सुदृढ़ करना है।





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