भारत में संघीय संसदीय प्रणाली अपनाई गई है, जिसमें संसद और राज्य विधानमंडल को अलग-अलग स्तरों पर विधायी शक्तियाँ दी गई हैं। संविधान उनकी संरचना, कार्यप्रणाली, शक्तियों, विशेषाधिकारों और चुनौतियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है।
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• भारतीय संविधान संसदीय शासन प्रणाली को अपनाता है, जिसमें संसद और राज्य विधानमंडलों को सूचीबद्ध विषयों पर कानून बनाने का अधिकार दिया गया है।
• संसद में राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं, जहाँ लोकसभा प्रत्यक्ष जनप्रतिनिधित्व और राज्यसभा राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है।
• राज्य विधानमंडल एकसदनीय या द्विसदनीय हो सकते हैं, लेकिन वर्तमान में केवल कुछ राज्यों में ही विधान परिषद की व्यवस्था है।
• संसद विधि निर्माण, कार्यपालिका पर नियंत्रण, वित्तीय स्वीकृति और संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य करती है।
• राज्य विधानमंडल राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाते हैं, बजट पारित करते हैं और राज्य सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
• संसद और राज्य विधानमंडलों में कार्य संचालन उनके अपने नियमों द्वारा किया जाता है, जिनका आधार संविधान के अनुच्छेद हैं।
• विधायी विशेषाधिकार सदस्यों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कार्यवाही में संरक्षण प्रदान करते हैं, जिससे विधायिका की स्वतंत्रता बनी रहती है।
• घटती बहस की गुणवत्ता, बार-बार स्थगन, कम बैठक दिवस और राजनीतिक अव्यवस्थाएँ संसद व राज्य विधानमंडलों के प्रमुख मुद्दे बनते जा रहे हैं।





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