पागल पंथी विद्रोह 19वीं सदी की शुरुआत में बंगाल के मयमनसिंह और शेरपुर क्षेत्रों में हुआ। यह एक धार्मिक आंदोलन से शुरू होकर ब्रिटिश शासन और जमींदारी शोषण के खिलाफ सशस्त्र किसान विद्रोह बना।
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- पागल पंथियों की स्थापना करीम शाह ने की
- 1813 के बाद नेतृत्व उनके पुत्र टीपू शाह ने संभाला
- मुख्य क्षेत्र: मयमनसिंह और शेरपुर
- अनुयायी: हाजोंग और गारो जनजाति के किसान
- विश्वास में सूफी, हिंदू और जनजातीय तत्व
- विद्रोह का कारण: भारी कर और जबरन वसूली
- अंग्रेजों और जमींदारों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष
- शेरपुर में राजस्व और जमींदारी दफ्तरों पर हमला
- 1833 में टीपू शाह गिरफ्तार, आंदोलन कमजोर
- किराया रियायतों से शांति बहाल, विद्रोह समाप्त





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