राजस्थान के Aravalli Hills क्षेत्र में आने वाले जिले अवैध खनन से सबसे अधिक प्रभावित हैं। कम वैध खनन पट्टों और सीमित उत्पादन के बावजूद, राज्य में दर्ज अधिकांश अवैध खनन मामले इन्हीं जिलों से जुड़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, तीन-चौथाई से अधिक FIR अरावली क्षेत्र से दर्ज की गई हैं। प्रस्तावित कानूनी बदलावों से पर्यावरणीय सुरक्षा कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है।
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- राजस्थान के अरावली जिले लगभग 70% अरावली पर्वत श्रृंखला को कवर करते हैं, जिससे यह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बनता है।
- इन जिलों के पास राज्य के 45% से कम खनन पट्टे हैं, यानी वैध खनन गतिविधि अपेक्षाकृत सीमित है।
- कुल खनिज उत्पादन में अरावली जिलों की हिस्सेदारी लगभग 40% है, जो कम वैध खनन को दर्शाती है।
- इसके बावजूद, 56% से अधिक अवैध खनन मामले अरावली क्षेत्र से सामने आते हैं।
- राज्य में दर्ज 77% से अधिक अवैध खनन FIR इन्हीं जिलों से संबंधित हैं।
- यह स्थिति अरावली क्षेत्र को राजस्थान के खनन संकट का केंद्र बनाती है।
- ‘अरावली पहाड़ी’ की परिभाषा में प्रस्तावित बदलाव से खनन प्रतिबंध हटने का खतरा है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, इससे अवैध खनन और बढ़ सकता है, बजाय इसके कि वह नियंत्रित हो।





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