लोकसभा में संविधान संशोधन के दो बिल पेश किए गए हैं, जो ‘वन नेशन, वन पोल’ पहल के तहत लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ आयोजित करने का प्रस्ताव रखते हैं। इस पर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, और कांग्रेस ने बिल को तुरंत वापस लेने की मांग की है। इन बिलों को आगे की चर्चा के लिए एक संयुक्त समिति के पास भेजे जाने की संभावना है।
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- कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने संविधान (129वां संशोधन) बिल लोकसभा में पेश किया।
- बिल को एक संयुक्त समिति के पास भेजा जा सकता है, जिसकी अध्यक्षता बीजेपी करेगी, और इसकी प्रारंभिक अवधि 90 दिन होगी।
- कांग्रेस के मनीष तिवारी और सपा के धर्मेंद्र यादव समेत विपक्षी नेताओं ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की।
- कांग्रेस ने बिल को तुरंत वापस लेने की मांग की, और इसे विधानमंडल की शक्तियों से बाहर बताया।
- विपक्ष ने चेतावनी दी कि यह प्रस्ताव तानाशाही की ओर ले जा सकता है और संविधान की मूल संरचना को कमजोर कर सकता है।
- बीजेपी के सहयोगी दलों ने इस बिल का समर्थन किया, जिसमें आंध्र प्रदेश की टीडीपी, यSR कांग्रेस और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) शामिल हैं।
- सरकार ने कहा कि बार-बार और बिखरे हुए चुनावों से लोकतंत्र में असमर्थता आ रही है।
- बिल में राज्यों की विधानसभा के कार्यकाल को लोकसभा से जोड़ा गया है, जो 2029 के बाद चुनावों को समकालिक बनाएगा।
- इस बिल के प्रावधान 2034 से पहले लागू नहीं होंगे, और इसे नए लोकसभा के पहले सत्र के बाद लागू किया जाएगा।
- संशोधनों को राज्यों की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों को राज्यों से आधी स्वीकृति की आवश्यकता हो सकती है।





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