ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ीं।
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- ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं।
- पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है।
- होरमुज जलडमरूमध्य के मार्ग से प्रतिदिन वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग बीस प्रतिशत गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी बाधा से बाजार प्रभावित हो सकता है।
- क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हमलों और जहाजों की आवाजाही में कमी से इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे उत्पादक देशों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
- तेल कीमतों में तेजी से वैश्विक वित्तीय बाजारों में चिंता बढ़ी है और इससे महंगाई तथा आर्थिक वृद्धि पर दबाव पड़ने की आशंका है।
- कई देशों ने बढ़ती ऊर्जा लागत के प्रभाव को कम करने के लिए आपात कदम जैसे ईंधन मूल्य नियंत्रण और भंडार उपयोग की तैयारी शुरू की है।
- भारत ने पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
- विशेषज्ञों के अनुसार दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, ऊर्जा दक्षता में सुधार और रणनीतिक भंडार का विस्तार आवश्यक होगा।





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