हालिया शोध से यह सिद्ध हुआ है कि चंद्रमा का निर्माण पृथ्वी से टकराने के बाद उड़कर आई सामग्री से हुआ था, जो प्रारंभिक सौर मंडल में एक विशाल टक्कर के कारण हुई थी। इस अध्ययन ने पृथ्वी पर पानी आने के तरीके को भी उजागर किया है।
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- चंद्रमा का निर्माण तब हुआ जब एक मंगल आकार का प्रोटोप्लैनेट, थिया, पृथ्वी से टकराया और मलबा अंतरिक्ष में फैलकर चंद्रमा बन गया।
- शोधकर्ताओं ने 14 चंद्रमा चट्टान के नमूनों का विश्लेषण किया और उन्हें पृथ्वी के खनिजों से तुलना की।
- चंद्रमा और पृथ्वी के नमूनों में ऑक्सीजन-17 आइसोटोप के समान स्तर मिले, जो यह दर्शाता है कि इनकी उत्पत्ति एक ही स्रोत से हुई थी।
- इसका मतलब है कि चंद्रमा की अधिकांश सामग्री पृथ्वी के प्रारंभिक मैंटल से आई, जबकि थिया का योगदान बहुत कम था।
- अध्ययन से यह पता चलता है कि थिया ने पहले के टक्करों में अपनी चट्टानी परत खो दी थी और फिर पृथ्वी से टकराया जैसे एक धातु की गेंद।
- थिया की सामग्री पृथ्वी के कोर में समाहित हो गई, जबकि चंद्रमा पृथ्वी के मैंटल से निकलने वाले मलबे से बना।
- यह अध्ययन यह भी बताता है कि पृथ्वी पर पानी कहाँ से आया।
- वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा बनने के बाद क्षुद्रग्रहों, विशेषकर एनसटाइट कोंड्राइट्स, से पृथ्वी पर पानी आया।
- यह निष्कर्ष पृथ्वी और चंद्रमा के बीच रचनात्मक संबंध को और स्पष्ट करता है।
- यह अध्ययन चंद्रमा की उत्पत्ति और पृथ्वी पर पानी के स्रोत को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।





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