नाटो ने आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच सैन्य समन्वय मजबूत करने के लिए ‘आर्कटिक सेंट्री’ पहल की शुरुआत की है।
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आर्कटिक सेंट्री कोई स्थायी बल नहीं बल्कि मौजूदा सैन्य अभ्यासों को एकीकृत करने वाला समन्वय ढांचा है।
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इस पहल की निगरानी नाटो के जॉइंट फोर्स कमांड, नॉरफोक द्वारा की जाएगी, जिससे अंतरसंचालनीयता और समन्वय बेहतर होगा।
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यह डेनमार्क के आर्कटिक एंड्योरेंस और नॉर्वे के कोल्ड रिस्पॉन्स जैसे अभ्यासों को एक साझा ढांचे में जोड़ता है।
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जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री बर्फ पिघलने से नए समुद्री मार्ग और संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र का महत्व बढ़ा है।
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रूस ने आर्कटिक तट पर मजबूत सैन्य उपस्थिति बनाए रखी है, जबकि चीन ने स्वयं को निकट-आर्कटिक राज्य बताते हुए अपनी भागीदारी बढ़ाई है।
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ग्रीनलैंड को लेकर उत्पन्न कूटनीतिक तनाव के बाद यह पहल नाटो की एकजुटता को पुनर्स्थापित करने का प्रयास मानी जा रही है।
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यूनाइटेड किंगडम ने नॉर्वे में सैनिकों की तैनाती बढ़ाने की घोषणा की है और अन्य यूरोपीय देश भी अभ्यासों में भागीदारी के संकेत दे चुके हैं।





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