राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना वर्ष 1993 में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत की गई, ताकि भारत में मानव गरिमा, समानता और स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों की रक्षा, निगरानी और संवर्धन किया जा सके।
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राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोगों की स्थापना 1993 में मानवाधिकारों की संस्थागत सुरक्षा के लिए की गई।
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आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 और 2006 संशोधन के तहत कार्य करता है।
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NHRC का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश होता है।
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सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा उच्चस्तरीय चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है।
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आयोग मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच, जेल निरीक्षण और कानूनों की समीक्षा कर सकता है।
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इसके पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ हैं, लेकिन निर्णय बाध्यकारी नहीं होते।
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संसाधनों की कमी, सीमित स्वायत्तता और सरकारी निर्भरता आयोग की प्रभावशीलता को प्रभावित करती है।





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