नासा ने मंगलवार को अपने आर्टेमिस कार्यक्रम में बड़े बदलाव की घोषणा की। चंद्र कक्षा में बनने वाले अंतरिक्ष स्टेशन की योजना रोककर अब चंद्र सतह पर लगभग 20 अरब डॉलर का आधार बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। यह कदम 2028 तक मानव को चंद्रमा पर उतारने और 2030 तक चीन की योजना से पहले बढ़त बनाने के लिए उठाया गया है, साथ ही मंगल के लिए परमाणु ऊर्जा चालित यान की तैयारी भी की जा रही है।
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- नासा ने चंद्र कक्षा स्टेशन की वर्तमान योजना रोककर चंद्र सतह पर स्थायी आधार बनाने का निर्णय लिया।
- लगभग 20 अरब डॉलर की लागत वाला यह आधार दीर्घकालिक मानव उपस्थिति और संचालन को समर्थन देगा।
- इस बदलाव का उद्देश्य चीन से पहले मानव को चंद्रमा पर वापस भेजने की गति बढ़ाना है।
- चंद्र सतह की तैयारी के लिए अधिक रोबोटिक यान और ड्रोन तैनात करने की योजना है।
- नासा चंद्रमा पर ऊर्जा आपूर्ति के लिए परमाणु ऊर्जा प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम करेगा।
- स्पेस रिएक्टर वन फ्रीडम नामक परमाणु ऊर्जा चालित यान को 2028 से पहले मंगल के लिए भेजने की योजना है।
- यह मिशन गहरे अंतरिक्ष में परमाणु विद्युत प्रणोदन का परीक्षण करेगा और मंगल पर हेलीकॉप्टर तैनात करेगा।
- जापान, कनाडा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी जैसे साझेदारों की भूमिकाओं में बदलाव संभव है।
- स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के चंद्र अवतरण यान कार्यक्रम समय से पीछे चल रहे हैं।
- नासा अब उसी यान का उपयोग करेगा जो पहले तैयार होगा, तय क्रम को प्राथमिकता नहीं देगा।





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