दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने दिल्ली में कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य गोबर का वैज्ञानिक उपयोग, यमुना नदी की सफाई, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और पशुपालकों की आय बढ़ाना है।
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- MCD और NDDB ने दिल्ली में कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट स्थापित करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
- इस पहल का उद्देश्य गोबर का वैज्ञानिक उपयोग करना है।
- यह परियोजना यमुना नदी के प्रदूषण को कम करने में सहायक होगी।
- समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
- यह पहल वेस्ट-टू-एनर्जी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी।
- गोबर का प्रसंस्करण नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर CBG प्लांटों में किया जाएगा।
- इस योजना से दिल्ली के लगभग 1.25 लाख मवेशियों का गोबर प्रबंधित किया जाएगा।
- सरकार का लक्ष्य है कि यमुना में गोबर का प्रवाह पूरी तरह रोका जाए।
- दिल्ली में लगभग 80 सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्रों पर कार्य जारी है।
- सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक यमुना में बिना उपचारित अपशिष्ट जल का प्रवाह पूरी तरह रोकना है।
- पशुपालकों को प्रसंस्करण के लिए दिए गए गोबर पर ₹1 प्रति किलोग्राम का भुगतान किया जाएगा।
- इस परियोजना से जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
- यह पहल पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर उत्पन्न करेगी।
- इस मॉडल को देश के अन्य महानगरों में भी लागू किया जा सकता है।
- यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और नदी संरक्षण को बढ़ावा देगी।





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