जस्टिस मूवमेंट 20वीं सदी की शुरुआत में मद्रास प्रेसिडेंसी में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य गैर-ब्राह्मणों को शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाना था। यह आंदोलन डॉ. सी. नटेसा मुदलियार, टी.एम. नायर और त्यागराजा चेत्ती जैसे नेताओं के नेतृत्व में हुआ और आगे चलकर द्रविड़ आंदोलन की नींव बना।
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- 1916 में गैर-ब्राह्मण नेताओं ने राजनीतिक-सामाजिक अधिकारों के लिए शुरू किया
- साउथ इंडियन लिबरेशन फेडरेशन (SILF) से उभरी जस्टिस पार्टी
- अंग्रेजी पत्रिका Justice के ज़रिए मांगे रखी गईं
- 1920 के चुनाव जीते, भारत में पहली बार निर्वाचित सरकार बनाई
- नौकरी व शिक्षा में आरक्षण के लिए कम्युनल G.O. लागू किया
- देवदासी प्रथा खत्म की, महिलाओं को वोट का अधिकार व दोपहर भोजन योजना शुरू
- अन्नामलाई और आंध्र विश्वविद्यालयों की स्थापना, मंदिर प्रशासन में सुधार
- नीची जातियों को जमीन, सड़क, कुएँ आदि में बराबरी का हक मिला
- भ्रष्टाचार, अभिजात्य झुकाव, ब्रिटिश समर्थन व दलितों की उपेक्षा से गिरावट
- 1944 में सेल्फ-रेस्पेक्ट मूवमेंट से मिलकर द्रविड़ कषगम बना





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