हिरोशिमा की त्रासदी के अस्सी वर्ष बाद जापान पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान संकट में सक्रिय भूमिका निभाने का दबाव बढ़ रहा है।
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- हिरोशिमा परमाणु हमले के आठ दशक बाद जापान पर अमेरिका द्वारा ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का दबाव बढ़ रहा है।
- अमेरिका ने जापान से होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बल और बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज तैनात करने का अनुरोध किया है, ताकि वैश्विक ऊर्जा मार्ग सुरक्षित रह सकें।
- अमेरिका का मानना है कि मध्य पूर्व के तेल पर जापान की निर्भरता और लंबे समय से मिले सुरक्षा सहयोग के कारण उसे इस संकट में अधिक योगदान देना चाहिए।
- जापान का शांतिवादी संविधान और हिरोशिमा परमाणु हमले की ऐतिहासिक पीड़ा उसकी सैन्य भागीदारी को सीमित करती है, जिससे निर्णय लेना जटिल हो जाता है।
- प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची को देश के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जहां जनता का बड़ा हिस्सा सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ है।
- जापान एक ओर अमेरिकी दबाव को संतुलित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन से बढ़ते खतरे को लेकर भी रणनीतिक रूप से सतर्क है।
- एशिया से अमेरिकी सैन्य संसाधनों के मध्य पूर्व की ओर स्थानांतरण से जापान को पूर्वी चीन सागर और ताइवान क्षेत्र में सुरक्षा कमजोर होने की चिंता है।
- जापान रक्षा सहयोग के नए उपायों के माध्यम से अपनी भूमिका बढ़ाने पर विचार कर रहा है, जो उसकी पारंपरिक सीमित सुरक्षा नीति में बदलाव का संकेत देता है।





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