कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में पूर्ववर्ती (ex post facto) पर्यावरण मंजूरी को चुनौती दी है, इसे कानूनी रूप से अवैध, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और शासन की कमजोरियों को दिखाने वाला बताया है।
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जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में पूर्ववर्ती पर्यावरण मंजूरी को चुनौती दी, इसे कानूनविरुद्ध और जनता के लिए हानिकारक बताया।
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इस तरह की मंजूरियां अक्सर परियोजनाओं को पर्यावरण नियमों को दरकिनार करने का अवसर देती हैं।
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याचिका सुप्रीम कोर्ट के 29 दिसंबर, 2025 के अरावली भूमि पुनर्परिभाषा फैसले की समीक्षा पर प्रेरित है।
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रमेश का कहना है कि ये मंजूरियां शासन की साख को कमजोर करती हैं और पर्यावरण नियमों को नजरअंदाज करती हैं।
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याचिका में पर्यावरणीय अनुमोदन की अपर्याप्त समीक्षा के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को उजागर किया गया है।
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कांग्रेस नेता सुप्रीम कोर्ट से पर्यावरण शासन और अनुपालन पर कड़ी निगरानी का आग्रह कर रहे हैं।
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इस कानूनी चुनौती से भविष्य की परियोजनाओं की मंजूरी और पर्यावरणीय अनुपालन प्रभावित हो सकता है।





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