जहाँगीर, अकबर के ज्येष्ठ पुत्र, ने 1605 से लेकर 1627 तक मुग़ल साम्राज्य पर शासन किया। उनके शासनकाल में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाएँ, सांस्कृतिक उपलब्धियाँ और व्यक्तिगत संघर्ष देखने को मिले। पारिवारिक संघर्षों से लेकर बाहरी कूटनीतिक रिश्तों तक, जहाँगीर का शासन सैन्य विजय, सत्ता के बदलाव और कला एवं संस्कृति के उत्कर्ष से भरा हुआ था।
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- जहाँगीर ने 1605 में अकबर के निधन के बाद साम्राज्य की सत्ता संभाली।
- 1605 में, जहाँगीर के सबसे बड़े पुत्र ख़ुसरो ने विद्रोह किया, जिसे हराकर गुरु अर्जुन देव को फांसी दी गई।
- 1614 में, जहाँगीर के पुत्र शाहजहाँ (खुर्रम) ने मेवाड़ के राणा अमर सिंह को हराया।
- 1620 में, जहाँगीर ने कानगड़ह पर विजय प्राप्त की।
- 1622 में कंधार क्षेत्र मुग़ल साम्राज्य से छिन गया।
- 1615 में अंग्रेज़ राजदूत सर थॉमस रो भारत आए और व्यापारिक अधिकार प्राप्त करने की कोशिश की।
- 1623 में, खुर्रम ने विद्रोह किया, लेकिन 1625 में बाप-बेटे के बीच सुलह हो गई।
- जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा ‘तज्जुके जहाँगीरी’ में उल्लेख किया कि गुलाब से इत्र निकालने की विधि नूरजहाँ की मां (अस्मत बेगम) ने आविष्कार की थी।
- जहाँगीर कला के प्रति अत्यधिक उत्साही थे और उनके शासन को मुग़ल चित्रकला का स्वर्णकाल माना जाता है।
- अफीम और शराब की लत के कारण जहाँगीर का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा, और 28 अक्टूबर 1627 को उनका निधन हो गया।
- जहाँगीर को लाहौर के पास शहादरा में रावी नदी के किनारे दफनाया गया।
- उनके शासनकाल को मुग़ल चित्रकला का स्वर्णकाल माना जाता है।





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