भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने क्रायोजेनिक इंजन का सफल भू-परीक्षण 22 टन बल पर किया, जिससे भारी प्रक्षेपण यान की वहन क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
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• भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 10 मार्च को समुद्र तल पर क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया, जो 165 सेकंड तक 22 टन बल पर संचालित हुआ।
• परीक्षण के दौरान विशेष नोज़ल सुरक्षा प्रणाली और बहु घटक प्रज्वलन प्रणाली का उपयोग किया गया, जिससे इंजन का प्रज्वलन और संचालन पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बना रहा।
• इससे पहले इसी प्रणाली के साथ 19 टन बल पर समुद्र तल परीक्षण किया गया था, जबकि नया परीक्षण 22 टन बल के साथ महत्वपूर्ण तकनीकी उन्नति दर्शाता है।
• यह क्रायोजेनिक इंजन भारी प्रक्षेपण यान के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण को शक्ति प्रदान करता है, जो बड़े उपग्रहों और अंतरिक्ष अभियानों के प्रक्षेपण में उपयोगी है।
• भविष्य में प्रक्षेपण यान के उन्नत चरण में इसी इंजन का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रक्षेपण क्षमता बढ़ेगी और जटिल अंतरिक्ष अभियानों को समर्थन मिलेगा।
• समुद्र तल पर ऐसे इंजन का परीक्षण कठिन माना जाता है क्योंकि नोज़ल का निर्माण मुख्य रूप से अंतरिक्ष के निर्वात वातावरण में संचालन के लिए किया जाता है।
• कम निकास दाब और बड़े क्षेत्र अनुपात के कारण प्रवाह अस्थिर हो सकता है, जिससे कंपन, तापीय तनाव और यांत्रिक क्षति की संभावना बढ़ जाती है।
• नोज़ल सुरक्षा प्रणाली प्रवाह को नियंत्रित कर इंजन को स्थिर बनाए रखती है और परीक्षण के दौरान सुरक्षित तथा सटीक प्रदर्शन सुनिश्चित करती है।





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