पूर्व मिशन असफलताओं के बाद इसरो जीसैट-1ए (ईओएस-05) का प्रक्षेपण कर भू-स्थिर कक्षा से रियल-टाइम पृथ्वी अवलोकन क्षमता बहाल करने जा रहा है।
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इसरो चार वर्षों बाद जीसैट-1ए उपग्रह का प्रक्षेपण करने की तैयारी कर रहा है, जो असफल जीसैट-1 (ईओएस-03) का प्रतिस्थापन होगा।
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अगस्त 2021 में जीएसएलवी-एफ10 मिशन के दौरान क्रायोजेनिक अपर स्टेज में खराबी के कारण मूल जीसैट-1 उपग्रह कक्षा में नहीं पहुंच सका था।
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2.2 टन श्रेणी का यह उपग्रह भारतीय उपमहाद्वीप की बार-बार और लगभग रियल-टाइम भू-इमेजिंग के लिए डिजाइन किया गया है।
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जीसैट-1ए से कृषि, वानिकी, आपदा प्रबंधन, महासागरीय अध्ययन, हिमनद निगरानी और बादल विश्लेषण में सहायता मिलेगी।
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यह उपग्रह रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हर मौसम में निगरानी की क्षमता प्रदान कर सशस्त्र बलों की योजना में सहायक होगा।
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उपग्रह ने बेंगलुरु स्थित यू आर राव सैटेलाइट सेंटर में प्रमुख परीक्षण पूरे कर लिए हैं और श्रीहरिकोटा भेजे जाने की प्रतीक्षा में है।
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जीएसएलवी-एफ17 मिशन के लिए नोटिस टू एयरमैन जारी किया गया है और प्रक्षेपण की संभावित अवधि 20 फरवरी से 5 मार्च के बीच है।





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