भारत में अंतर्राज्यीय जल विवाद तब उत्पन्न होते हैं जब राज्य नदी जल के उपयोग और वितरण को लेकर असहमत होते हैं। Article 262 of Indian Constitution के तहत ऐसे विवादों के समाधान के लिए विशेष न्यायाधिकरण बनाए जाते हैं, जिससे जल का न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित हो सके।
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- अंतर्राज्यीय जल विवाद राज्यों के बीच नदी जल के उपयोग और वितरण को लेकर होते हैं।
- Article 262 of Indian Constitution संसद को विवाद समाधान के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है।
- इसके तहत Supreme Court of India के अधिकार क्षेत्र को सीमित किया जा सकता है।
- Inter-State Water Disputes Act 1956 केंद्र को न्यायाधिकरण स्थापित करने का अधिकार देता है।
- न्यायाधिकरण के निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होते हैं।
- River Boards Act 1956 नदी प्रबंधन के लिए सलाहकार बोर्ड की व्यवस्था करता है।
- गैर न्यायिक तंत्र सार्वजनिक हित को बेहतर तरीके से संबोधित करता है।
- प्रमुख विवादों में कावेरी, कृष्णा, गोदावरी, नर्मदा और महानदी शामिल हैं।
- कई मामले अभी भी न्यायाधिकरण या न्यायालय में लंबित हैं।
- इनका समाधान संघीय संतुलन और संसाधन प्रबंधन के लिए आवश्यक है।





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