बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) वे कानूनी अधिकार हैं जो व्यक्तियों को उनकी मानसिक रचनाओं पर दिए जाते हैं, जिससे उन्हें मान्यता और आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके तथा नवाचार को बढ़ावा मिले।
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IPR को मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद 27 के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त है।
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प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समझौतों में पेरिस कन्वेंशन (1883), बर्न कन्वेंशन (1886) तथा WIPO द्वारा प्रशासित संधियाँ शामिल हैं।
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बौद्धिक संपदा में आविष्कार, साहित्यिक और कलात्मक कृतियाँ, डिज़ाइन, प्रतीक, नाम और व्यापार में उपयोग होने वाली छवियाँ शामिल हैं।
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IPR के मुख्य प्रकार हैं – कॉपीराइट, पेटेंट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिज़ाइन, भौगोलिक संकेत (GI) और ट्रेड सीक्रेट।
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पेटेंट आमतौर पर 20 वर्षों के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है, जबकि पारंपरिक ज्ञान, परमाणु ऊर्जा संबंधी आविष्कार और मात्र वैज्ञानिक खोजें पेटेंट योग्य नहीं हैं।
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भारत में IPR का संचालन कॉपीराइट अधिनियम 1957, पेटेंट अधिनियम 1970, ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 और GI अधिनियम 1999 के माध्यम से होता है।
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भारत WTO-TRIPS समझौते तथा कई WIPO संधियों जैसे पेटेंट सहयोग संधि और मैड्रिड प्रोटोकॉल का सदस्य है।
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भारत में चुनौतियों में पेटेंट एवरग्रीनिंग (धारा 3(d)), अनिवार्य लाइसेंसिंग और डेटा एक्सक्लूसिविटी की मांग शामिल हैं।
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IPR के लाभों में नवाचार को बढ़ावा, आर्थिक विकास और व्यापार सुगमता शामिल हैं, जबकि हानियों में उच्च लागत, पायरेसी और स्वास्थ्य आपातकाल में उपलब्धता की समस्या शामिल है।
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प्रत्येक वर्ष 26 अप्रैल को विश्व बौद्धिक संपदा दिवस मनाया जाता है ताकि नवाचार और सृजनात्मकता में IPR की भूमिका पर प्रकाश डाला जा सके।





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