1947 में स्वतंत्रता के साथ, भारत के सामने 565 देशी रियासतों को एकीकृत करने की चुनौती थी। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ने उन्हें स्वतंत्र विकल्प दिए, लेकिन सरदार पटेल और वी.पी. मेनन की कूटनीति ने भारत का राजनीतिक मानचित्र आकार दिया।
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• 565 रियासतें ब्रिटिश शासन हटने पर कानूनी रूप से स्वतंत्र हुईं
• विकल्प: भारत में शामिल हों, पाकिस्तान में जाएँ, या स्वतंत्र रहें
• पटेल–मेनन का समाधान: रक्षा, विदेश और संचार में भारत का नियंत्रण
• रियासतों को मनाने के लिए ‘प्रिवी पर्स’ की अवधारणा लागू
• शुरुआती विलय: बिकानेर, बड़ौदा, राजस्थान की कई रियासतें
• त्रावणकोर ने पहले इंकार किया; हत्या के प्रयास के बाद विलय स्वीकार
• जूनागढ़ ने पाकिस्तान जॉइन किया; जनमत-संग्रह के बाद भारत में शामिल
• हैदराबाद ने रज़ाकारों के सहारे विरोध किया; 1948 की पुलिस कार्रवाई के बाद विलय
• कश्मीर ने पाक समर्थित कबायली हमले के बाद भारत से मदद माँगी और दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए
• पटेल ने 565 में से 562 रियासतों का ऐतिहासिक विलय किया





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