भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अगले दशक में पांच गुना बढ़कर 44 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि निजी निवेश पहले ही ₹1,000 करोड़ से अधिक हो चुके हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में नेतृत्व की बात करते हुए गगनयान और सीमा सुरक्षा जैसे अभियानों को प्रमुख उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
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- भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अगले दशक में 44 बिलियन डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश पहले ही ₹1,000 करोड़ को पार कर चुका है।
- केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत की आत्मनिर्भरता की बात करते हुए गगनयान और सीमा सुरक्षा को प्रमुख उदाहरण बताया।
- भारत को अब अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में एक वैश्विक नेता के रूप में देखा जा रहा है।
- बिजनेस कोंक्लेव और अवार्ड्स 2025 में भारत के ‘विकसित भारत’ बनने के रोडमैप पर चर्चा की गई।
- अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी पारनाइक ने सीमा सुरक्षा की अहमियत पर जोर दिया, साथ ही चीन और म्यांमार से आ रहे आतंकवादियों से होने वाली चुनौतियों का जिक्र किया।
- सीमा सुरक्षा के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे और सेना-नागरिक समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भारत के डिजिटल ढांचे को आधुनिक बनाने की आवश्यकता जताई, विशेष रूप से पुराने IT अधिनियम में सुधार की बात की।
- IT अधिनियम में इंटरनेट और AI जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का उल्लेख नहीं किया गया है, जो आज के डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख कारक हैं।
- चंद्रशेखर ने सरकार से एक नए समग्र कानून या लक्षित नियमों की मांग की, जो सुरक्षा, हानि, और सूचना के दुरुपयोग को नियंत्रित कर सके, साथ ही उद्यमिता को प्राथमिकता दे।





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