भारत खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर समग्र पोषण सुरक्षा की ओर अग्रसर है, जिसमें सूक्ष्म पोषक तत्व, मातृ स्वास्थ्य, आहार विविधता और जलवायु अनुकूल कृषि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
BulletsIn
- अनाज उत्पादन में वृद्धि के बावजूद देश की लगभग बारह प्रतिशत जनसंख्या अभी भी कुपोषित है और वैश्विक भूख सूचकांक में स्थिति चिंताजनक है।
- पाँच वर्ष से कम आयु के लगभग पैंतीस प्रतिशत बच्चे अवरुद्ध वृद्धि से और लगभग उन्नीस प्रतिशत बच्चे क्षीणता से प्रभावित हैं।
- महिलाओं और बच्चों में रक्ताल्पता व्यापक है, जो सूक्ष्म पोषक तत्वों की गंभीर कमी को दर्शाती है।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुदृढ़ीकृत चावल और पोषक तत्व समृद्ध फसलों को शामिल कर पोषण स्तर सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।
- डिजिटल निगरानी प्रणाली के माध्यम से लाभार्थियों की वास्तविक समय पर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है।
- मोटे अनाज और क्षेत्रीय खाद्यान्नों को प्रोत्साहित कर आहार विविधता बढ़ाने तथा मधुमेह जैसी बीमारियों से निपटने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
- जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों की पोषण गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे जलवायु अनुकूल कृषि की आवश्यकता बढ़ गई है।
- फल, सब्जी और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की ऊँची कीमतें तथा स्वच्छता की कमी पोषण योजनाओं की प्रभावशीलता को सीमित करती हैं।





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.