भारत की विनिर्माण गतिविधि अगस्त में 2008 के बाद सबसे तेज़ रही। मजबूत घरेलू मांग, निर्यात की अग्रिम शिपमेंट और सरकारी पूंजीगत व्यय ने इस वृद्धि को बल दिया। कोर सेक्टर का उत्पादन भी 13 महीनों में सबसे तेज़ गति से बढ़ा, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद।
BulletsIn
- अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग PMI 59.3, 2008 के बाद सबसे ऊँचा
- जुलाई का PMI 59.1, 50 से ऊपर होना विस्तार का संकेत
- सबसे तेज़ वृद्धि इंटरमीडिएट गुड्स में, फिर कैपिटल और कंज्यूमर गुड्स
- कोर सेक्टर उत्पादन 6.3% वार्षिक, 13 महीनों में सबसे तेज़
- कोयला उत्पादन 11.4% ↑, स्टील 14.2% ↑, मुख्य योगदान
- उर्वरक और रिफाइनरी उत्पादों ने भी बढ़त दी
- कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस अभी भी गिरावट में, लेकिन धीमी
- अमेरिकी टैरिफ़ खतरे से अगस्त में निर्यात शिपमेंट तेज़ हुए
- सरकारी कैपेक्स से स्टील, सीमेंट, बिजली, कोयले की मांग बढ़ी
- भविष्य की स्थिरता मानसून बाद निर्माण, उर्वरक मांग और व्यापार वार्ता पर निर्भर





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