अमेरिका-चीन आर्थिक टकराव और ट्रम्प 2.0 के तहत अमेरिका की आक्रामक टैरिफ नीति दर्शाती है कि आर्थिक परस्पर निर्भरता संघर्ष रोकने के बजाय उसे बढ़ा सकती है। कृषि-निर्भर भारत के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका और चीन दोनों के टैरिफ युद्धों का असर सीधे भारतीय कृषि और व्यापार पर पड़ रहा है।
BulletsIn:
* वैश्वीकरण को कभी संघर्ष-रोधी माना गया, अब रणनीतिक टकराव बढ़ा रहा
* अमेरिका–चीन आर्थिक निर्भरता व्यापार संघर्षों का नया हथियार बनी
* ट्रम्प 2.0: सभी आयात पर 10% बेस टैरिफ, कई देशों पर 50% तक दंडात्मक शुल्क
* छोटे देशों जैसे टोगो तक को 10% अमेरिकी टैरिफ झेलना पड़ा
* चीन ने भारतीय कीटनाशक साइपरमेथ्रिन पर 5-साल का 48.4%–166.2% टैरिफ लगाया
* भारत के फलों, प्याज़, चीनी पर पहले भी चीन की रोक
* अमेरिकी टैरिफ से वैश्विक कृषि बाज़ारों में अस्थिरता बढ़ी
* 2018: अमेरिका ने स्टील/एल्युमिनियम पर 25% शुल्क → भारत ने 28 अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ
* इससे अमेरिकी फलों-नट्स का निर्यात ~35% गिरा; किसानों को नुकसान
* 2025 में 50% अमेरिकी टैरिफ से $48.2 bn व्यापार दबाव में; कृषि सबसे अधिक प्रभावित
* सबक: भारत को बाज़ार विविधीकरण, कृषि सुरक्षा और संतुलित प्रतिकार नीति अपनानी होगी





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