भारत की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली ने 2014 से सब्सिडी में रिसाव को रोका और लाभार्थियों को सीधे भुगतान सुनिश्चित किया। ब्लूकाफ्ट डिजिटल फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, DBT ने 2009 से 2024 तक ₹3.48 लाख करोड़ की बचत की, और लाभार्थियों की संख्या 16 गुना बढ़ी।
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- DBT से 2009–2024 में ₹3.48 लाख करोड़ की बचत
- लाभार्थी संख्या 11 करोड़ से 176 करोड़ हुई
- सरकारी खर्च में सब्सिडी हिस्सेदारी 16% से घटकर 9% हुई
- आधार लिंक राशन से खाद्य सब्सिडी में ₹1.85 लाख करोड़ की बचत
- मनरेगा में 98% वेतन समय पर मिले; ₹42,534 करोड़ की बचत
- पीएम-किसान से 2.1 करोड़ अपात्र हटे; ₹22,106 करोड़ बचाए
- उर्वरक सब्सिडी में ₹18,699 करोड़ की बचत, लक्ष्य आधारित वितरण से
- कोविड-19 में सब्सिडी बढ़ी, लेकिन बाद में सुधार लौटा
- लाभार्थी कवरेज और बचत में 0.71 का पॉजिटिव संबंध
- वेलफेयर एफिशिएंसी इंडेक्स (WEI) 2014 में 0.32 से बढ़कर 2023 में 0.91 हुआ





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